Sunday 23 June 2024 5:17 AM
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समाज की महिलाओं के बिना समाज विकास की परिकल्पना अधूरी है

दिल्ली , समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l  समाज जब संगठित होता है तो उसका परिणाम दिखता है । मादीपुर क्षेत्र में कार्यरत रैगर समाज पंचायत के तत्वाधान में नारी शक्ति रैगर संगठन के द्वारा समाज को संगठित किया गया । उसका परिणाम है 30 मई से 03 जून तक 350 युवतियों और बालिकाओं के लिए पांच दिवसीय निशुल्क सेल्फ डिफेन्स ट्रेनिंग का कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ । संगठित रैगर समाज एक ताकत है । लेकिन अभी भी समाज में व्याप्त मानसिक  रुढ़िवादी परम्पराओ को दूर करने की आवश्यकता है । समाज के समक्ष जो रुढ़िवादी परम्पराओ की चुनौतिया है उनका निवारण समाज के जन जागरण से ही संभव है । इसके लिए समाज में एकता बनाये रखने की आवश्यकता है ।

नेल्सन मंडेला ने कहा था, ‘‘दासता और रंगभेद की तरह गरीबी भी प्राकृतिक नहीं है । यह मनुष्य की अपनी देन है, और मानव जाति के प्रयासों से इसे दूर किया जा सकता है।’’ इसी प्रकार समाज में लिंग भेद भी मानवजन्य है । एक समाज वैसा ही आकार लेता है, जैसा उसके बारे में लगातार कहा जाता है । रैगर समाज भी अब अपने बारे में कही जाने वाली कहानियों को बदल रहा है । दृढ़ता, हिम्मत और निरंतरता से समाज के बेटा-बेटी तथा स्त्री-पुरूषों के स्तर में समानता लाने की सोच को बढ़ावा देने के प्रयास जारी है और भविष्य में लिंग भेद को समाप्त किये जाने की उम्मीद की जा सकती है ।

बाबा साहब डॉ० भीमराव अम्बेडकर जी ने कहा था, “समाज में महिलायें ही वास्तविक विकास की जननी है । महिलाओं के बिना विकास की परिकल्पना अधूरी है ।“ महिलाओं को संगठित कर आगे ले जाने में रैगर समाज पंचायत का बड़ा योगदान है । महिलाएं हर क्षेत्र में विकास की ओर अग्रसर हो रही है । महिलाएं अब अपनी पहचान की मोहताज नहीं है । समाज की महिलाएं आज सरकारी क्षेत्र में अधिकारी है स्कूलों में शिक्षक है इसके अलावा डॉक्टर, वकील, अभिनेत्री, कवि, राजनीति, गृहकार्य, संस्कृति और विज्ञान, पत्रकारिता, मनोरंजन, खेल, पाककला, आदि क्षेत्रो में अपने योग्यता और कार्य बल के आधार पर महिलाये अपनी भूमिका बखूबी निभा रही है ।

आज़ादी के बाद भी कई दसको तक सामाजिक क्षेत्र के निर्धन परिवारों में महिलाओं को आय मूलक गतिविधियाँ करने के अवसर नहीं मिलते थे, उनका जीवन केवल चूल्हे-चौके और घर की चार दीवारी तक ही सीमित रह जाता था । घर के संचालन, आय-व्यय, क्रय-विक्रय आदि सहित अन्य मुद्दों पर निर्णय लेने में पुरूषों का एकाधिकार था । सामाजिक संगठनो से जुड़कर महिलाओं को जो संवैधानिक अधिकार प्राप्त करने का अवसर मिला, उससे उन्होंने अपनी काबिलियत सिद्ध कर अपनी अलग पहचान बनाई ।

नारी शक्ति रैगर संगठन की अध्यक्षा श्रीमति गीता सक्करवाल ने बताया कि समाज के सहयोग के बिना कुछ नहीं हो सकता l रैगर समाज पंचायत ने हमें जो जिम्मेदारी दी, उसको हमने हर समय तन-मन-धन से पूर्ण करने का प्रयास किया है l हम सब समाज के सेवक हैं और जो निर्देश समाज देता है, उसे हमें पूरा करना है l केवल समाज को संगठित रहने की आवश्यकता है l संगठित समाज ही एक नई दिशा दे सकता है l समाज के सभी भामाशाहो के सहयोग से भविष्य में समाज उत्थान व महिला सशक्तिकरण की योजनाओ पर कार्य शुरू किया जाएगा l

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