Thursday 18 July 2024 8:13 PM
Samajhitexpressआर्टिकलसंपादकीय

आओ जाने आखिर क्या फर्क है धर्मशाला और होटल, रिसोर्ट, मोटेल, लॉज, डारमेट्री व रेस्टोरेंट आदि में ठहरने का

दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l  अक्सर हम जब किसी यात्रा या पिकनिक टूर पर जाते है तो सबसे पहले रुकने की व्यवस्था तलाश करते हैं कि कम खर्च में ठहरने की व्यवस्था हो जाय, जिससे कि अपना बजट भी न बढ़े और अपना ट्रिप भी कामयाब हो जाये । परन्तु चिंता की बात नहीं आजकल हर जगह विशेषतौर पर धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, पौराणिक और बड़े से छोटे शहरों तथा नगरों में रुकने की अच्छी व्यवस्था हो गई हैं । समाजहित एक्सप्रेस द्वारा आज आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है कि धर्मशाला, होटल, रिसोर्ट, मोटेल, लॉज, डारमेट्री व रेस्टोरेंट आदि में क्या अंतर हैं :-

धर्मशाला : धर्मशाला एक ऐसी व्यवस्था होती है जहाँ यात्रियों को ठहराने की परंपरा रही हैं । यह भारत में अति प्राचीन समय से चली आ रही है l धर्मशाला में ठहरने वाले यात्री के लिए यह व्यवस्था या तो बिल्कुल निःशुल्क होती हैं या फिर मामूली शुल्क देना पड़ता हैं । धर्मशाला में रुकने के लिये कमरे बने होते हैं, किसी-किसी में रुकने के लिए बड़े-बड़े हाल भी बने होते हैं, जहाँ अकेले या परिवार के साथ इन कमरों में सुरक्षित रुका जा सकता हैं ।

अधिकांश धर्मशालाओं की प्रबंध व्यवस्था धार्मिक स्थलों के संगठनों या मंदिरों के ट्रस्ट की तरफ से किया जाता हैं । धर्मशालाओं में ठहरने वाले यात्री से जो भी शुल्क लिया जाता हैं वह सुविधा शुल्क मात्र होता हैं । इस सुविधा शुल्क को धर्मशाला के संचालको द्वारा धर्मशाला के रख-रखाव पर ही खर्च किया जाता हैं । उनका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं होता है l भारत में कई ऐसी धर्मशालायें भी हैं, जो अपनी प्रबंध व्यवस्थाओं के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं और सुविधाओं में अच्छे से अच्छे होटलों को भी पीछे छोड़ देते हैं । धर्मशालाओं की प्रबंध व्यवस्था सम्भाल रहे संचालको द्वारा ठहरने वाले यात्रियों के लिए कुछ विशेष नियम बनाये गये होते हैं, जिसका पालन करना यात्रियों का कर्तव्य होता हैं ।

कई धर्मशालाए विभिन्न समाज के दानदाताओ द्वारा अपने अपने समाज के लोगो के ठहरने के लिए बनाई गई होती है l जिनका सञ्चालन उसी समाज के लोगो द्वारा किया जाता है l इस प्रकार की धर्मशालाएं सामाजिक धर्मशाला कहलाती है l उसमे उस समाज के लोगो को ठहरने की विशेष वरीयता प्रदान होती है l ये धर्मशालाएं किसी व्यक्ति विशेष की निजी सम्पति नहीं होती है l ऐसी धर्मशाला का भी उद्देश्य लाभ कमाना नहीं होता है l

होटल : आजकल भारत में यात्रा के दौरान यात्रियों या श्रद्धालुओं या सैलानियों की पहली पसन्द होटल हो गयी है l होटल में यात्रियों या श्रद्धालुओं या सैलानियों हेतु सुविधा का ख़ास ध्यान रखा जाता हैं । अपने बजट के अनुसार होटल में कमरें बुक किये जा सकते हैं । होटल में रुकने के साथ कई प्रकार की सुविधा जैसे भोजन, नाश्ता, स्वीमिंग पूल, खेलने के लिए गेम की सुविधा इत्यादि उपलब्ध रहती है l होटल में रुकने के लिए आपको निर्धारित शुल्क अदा करना पड़ेगा । भुगतान किये गए निर्धारित शुल्क के आधार पर ही आपको सुविधा मिलती हैं । होटल के भी आपको कुछ नियम फ़ॉलो करने होंगे l होटल निःशुल्क नही होते हैं l

रिसोर्ट : रिसोर्ट एक लग्ज़री जगह है । जो अक्सर टूरिस्ट जगह पर बनाएं जाते है । जहां आपको किसी मजबूरी में नहीं बल्कि अपनी मर्जी से ज़िंदगी के मजे लेने जाते हो । इसमें तमाम सुविधाएं रहती है । यहां आपको बेहतरीन खाने से लेकर स्पोर्ट्स, एटरटेनमेंट और एडवेंचर जैसी तमाम चीजें मिलती हैं । चाहे स्विंमिंग पूल हो या स्पा, लेकिन जिस तरह की सुविधा उसी तरह का खर्चा ।

मोटल : अधिकतर हाईवे पर आपको मोटेल (MOTEL) देखने को मिलते हैं, जहाँ पर लम्बी दूरी तय करके यात्री जब अपने साधन जैसे- मोटर साइकिल, मोटर बाइक या मोटर कार (Four Wheeler) से आता हैं, तो इन्ही मोटल पर वह कुछ देर या रात भर आराम करता हैं । मोटल पर मोटर गाड़ी या निजी साधन को पार्क करने से लेकर उनके मरम्मत तक कि व्यवस्था मिल जाती हैं । इन सभी सुविधाओं को लेने के लिए यात्री को शुल्क अदा करना पड़ता हैं ।

लॉज : लॉज एक तरह से धर्मशाला का ही छोटा रूप होता हैं । यहाँ भी कमरे बने होते हैं परन्तु धर्मशाला या होटल जितने नही होते हैं । लॉज में रुकने के लिए आपको शुल्क देना पड़ेगा । किसी-किसी लॉज में रुकने के साथ ही भोजन और नाश्ते की भी व्यवस्था होती हैं ।

डारमेट्री (Dormitory) : यह होटल या धर्मशाला में उस कॉमन रूम कहते हैं जहाँ अलग-अलग बेड लगे होते हैं । इसमें अधिकतर अकेले यात्रा करने वाले ही रुकते हैं । इसका किराया भी होटल के कमरे के किराया से बहुत ही कम साधारण होता हैं । आजकल वेस्टर्न कल्चर के अनुसार डारमेट्री में एक बेड दूसरे बेड के ऊपर सीढ़ीनुमा संरचना में बना होता हैं । जिससे कि कम जगह में ज्यादा बेड लगा कर लोगो ठहराया जा सके ।

रेस्टोरेंट : रेस्टोरेंट में आप सिर्फ खाना खाने जा सकते है । यह देशी ढाबे को मॉडिफाई करके बनाया गया है या यूं कहे कि ढाबे का अपग्रेड वर्जन है रेस्टोरेंट l  यहाँ आपको आपकी टेबल पर सजा सजाया हुआ खाना मिलेगा । यहाँ पर आप सिर्फ खाना खाओ और जाओ l इसमे रुकने की व्यवस्था नहीं होती है ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close