Thursday 18 July 2024 6:58 PM
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गाँव गोपालपुर बिहार निवासी धर्मेन्द कुमार गोड़ को बेंगलूरु में आयोजित समारोह में सम्मानित किया जायेगा

दिल्लीसमाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l  गोपाल किरण समाजसेवी संस्था ग्वालियर द्वारा आगामी 28 अक्टूबर 2023 को बेंगलूरु में आयोजित एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार ब्रिलियंस अवार्ड सेरेमनी के भव्य समारोह में गाँव गोपालपुर बिहार निवासी धर्मेन्द कुमार गोड़ को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जायेगा l  धर्मेन्द कुमार गोड़ ने बीएड, एम.एड. तक शिक्षा पूर्ण की है और पीएचडी जारी रही है । सहायक प्राध्यापक हिन्दी विभाग डोनी पोलो महाविद्यालय ईटानगर अरूणाचल प्रदेश में कार्यरत है । इनकी चार किताबें प्रकाशित हो चुकी है l हिन्दी साहित्य लेखन कौशल सम्मान प्रयागराज उत्तर प्रदेश 2021 व विश्वविद्यालय वाद-विवाद सम्मान प्रयागराज उत्तर प्रदेश 2021से सम्मानित भी हो चुके है l

धर्मेन्द कुमार गोड़ ने बताया कि मैं जीवन के प्रारम्भिक चरण से ही शिक्षा के अतुल्य एवम् अद्भुत योगदान से विश्वव्यापी प्रभाव को महसूस करता रहा हूँ । यकीनन शिक्षण कार्य एक पेशा नही है अपितु यह एक विचार है जो समाज के उत्थान एवम् कल्याण हेतु अनंत काल से चिरस्मरणीय भूमिका निभा रहा है । पेशा व्यक्तिगत ज़ीवन को आकार देता है वही शिक्षण कार्य सम्पूर्ण समाज को बेहतर आकार में ढालने का कार्य करता है ।

ज़ीवन के वरीयता सूची में एक बेहतर शिक्षक बनने की कोशिश इसलिए है क्योंकि संसार में व्याप्त तामीर को शिक्षक रूपी चिराग़ ही दूर कर सकता है । यकीनन एक चिराग़ से हज़ारों घर रौशन हो सकते हैं । शिक्षक बनने की महत्वकांक्षा इसलिए भी प्रबल है कि यहाँ एक दिये से हज़ारों दिये जलाये जा सकते हैं । उज्जवल एवम् बेहतरीन नैतिक समाज देने के लिए बतौर शिक्षक प्रयासरत् रहूंगा ।

“किसी भी राष्ट्र को नष्ट करने के लिए परमाणु बमों के उपयोग या लंबी दूरी की मिसाइलों के उपयोग की आवश्यकता नहीं है, इसके लिए केवल शिक्षा की गुणवत्ता को कम करने और छात्रों को परीक्षाओं में नकल की अनुमति देने की आवश्यकता है ।

ऐसे डॉक्टरों के हाथों मरीज़ मरते हैं, ऐसे इंजीनियर्स के हाथों इमारतें ढह जाती हैं । ऐसे अर्थशास्त्रियों और लेखाकारों के हाथों पैसा बर्बाद होता है । ऐसे धार्मिक विद्वानों के हाथों मानवता मर जाती है । ऐसे न्यायाधीश लोगों के हाथों न्याय खो जाता है l क्योंकि “शिक्षा का पतन राष्ट्र का पतन है।”

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