Friday 04 April 2025 7:13 PM
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रैगर समाज के तीन युवाओ ने बिना दहेज के शादी कर – दिया समाज को अनुकरणीय संदेश

दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l  दहेज प्रथा समाज में एक अभिशाप है l समाजिक बुराई दहेजप्रथा के चलते गरीब लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है l राजस्थान में रैगर समाज के तीन युवाओ ने दूरदर्शी सोच के चलते अपनी शादी के समय दहेज की स्वीकृति को दृढ़ता से अस्वीकार करके एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है । आज के समय में उन युवाओ का यह निर्णय समानता, महिला व सामाजिक सशक्तिकरण और एक सदियों पुरानी सामाजिक बुराई के उन्मूलन के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है ।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक जयपुर (धाबास) में निवास कर रहे परस राम चोरोटिया गांव रोजड़ी ने अपने दो बेटों सुनील व अनिल की शादी बिंदायका निवासी रामावतार जी जलूथरिया तथा धानक्या निवासी रमेशजी जाजोरिया के यहाँ दिनाक 07 व 09 दिसंबर 2023 को संपन्न हुई । उक्त शादी में मात्र 101 रू नेक के साथ बिना दहेज कर समाज को अनुकरणीय संदेश दिया है । इस अवसर पर पहले बाबासाहब अंबेडकर की धानक्या गांव में चौक पर स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया गया ।

समाज में दहेज जैसी कुप्रथा से हम सब वाकिफ हैं । बावजूद इसके समाज में ज्यादातर शादियां इस प्रथा के बगैर नहीं होती हैं । एक तरफ सरकार दहेज के खिलाफ गांव-गांव संदेश देती है इससे प्रेरणा लेकर समाज के अन्य व्यक्तिओं को भी पहल करनी चाहिए । इन युवाओ ने समाज-सरकार को संदेश देते हुए बिना दहेज लिए शादी रचाई और इस प्रथा पर गहरी चोट की ।

नर्सिंग ऑफिसर सुरेंद्र बोहरा निवासी हरसौली ने की बिना दहेज शादी अनूठा अनुकरणीय उदाहरण पेश किया :

समाज में जहां एक ओर सरकारी नौकरी मिलने के बाद अच्छे घर, अच्छे दहेज की मांग व शानदार विवाह आयोजन की आकांक्षा बढ़ जाती है । वहीँ हरसोली जिला दूदू में बोहरा परिवार के रमेश चंद बोहरा (रैगर) के सुपुत्र सुरेंद्र कुमार बोहरा ने एक रुपये का रिश्ता कर समाज में जहां महिला सशक्तिकरण को बल दिया है, वहीं समाज में व्याप्त दहेज रूपी दानव पर वार कर एक शुभ संदेश दिया है, जिससे भ्रूण हत्या जैसे पाप को समाप्त करने का भी संदेश समाज में जाएगा ।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक गांव हरसोली जिला दूदू में नर्सिंग ऑफिसर (शिलोंग) सुरेंद्र कुमार बोहरा पुत्र रमेश चंद बोहरा (रैगर) ने मात्र एक रुपए नारियल के साथ सारी रस्में पूरी की और बिना दहेज का विवाह कर केवल कन्या और कलश लेकर समाज को बहुत अच्छा संदेश दिया है । इनकी हिम्मत-साहस-समझदारी को सैल्यूट है । सेंटर की सर्विस अधिकारी का पद और साधारण परिवार में शिक्षित कन्या से बिना दहेज विवाह कर आज आदर्श प्रस्तुत किया ही जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । इससे समाज में गरीब तबके के लोग भी बेजिझक अपनी बेटी को उच्च शिक्षा में अग्रसर करेंगे और योग्य बनाएंगे । साथ ही वर्तमान पीढ़ी और नौजवानों को भी इनसे बहुत कुछ समझने और सीखने को प्राप्त होगा । ऐसे धीरे धीरे समाज में दहेज प्रथा समाप्त होगी और बाबा साहेब के मूल मंत्र शिक्षित बनो-संगठित रहो-संघर्ष करो का सपना साकार होगा ।

इस अवसर पर कवि-लेखक-शिक्षक प्रभु दयाल रैगर और समाज के लोगो ने वर-वधु और सावरदा दूदू और हरसौली दूदू के दोनो परिवारों के मुखियाओं को शुभकामनाएं व बधाइयां प्रेषित की गई और नवयुगल के उज्जवल भविष्य की कामना की l समाज में ऐसे विवाह रोज हो और दिनोदिन समाज प्रगति करे, इसी आशा और विश्वास के साथ ।

नांगल निवासी रामनारायण अटल उर्फ़ छोटू राम ने अपने बेटे की शादी बिना दहेज़ कर अनूठी मिशाल कायम की :

पंचायत समिति बस्सी के ग्राम पंचायत रामरतनपुरा स्थित गिला की नांगल निवासी रामनारायण अटल उर्फ़ छोटू राम ने अपने छोटे सुपुत्र प्रशांत अटल का विवाह मनोहरिया वाला सांगानेर जयपुर निवासी नाथूलाल की सुपुत्री रितु के साथ एक रुपया व नारियल लेकर बिना दान दहेज़ के सामाजिक रीति-रिवाज से शादी सम्पन्न हुई l

इस शादी की न केवल शहर में बल्कि सामाजिक गलियारों में हर जगह खूब चर्चा हो रही है, क्योंकि दोनों रैगर समाज से है और रैगर समाज में शादी के अवसर पर लाखो रुपये खर्च करने में अपनी शान समझते हैं । लेकिन यहाँ वर वधु दोनों पक्षों के परिजनो ने समाज को नई दिशा देने का काम किया है । वर पक्ष ने वधू पक्ष से कोई दान दहेज नहीं लिया ।

दुनिया में बहुत ऐसे लोग हैं जिन्होंने समाज के उत्थान का विचार किया, लेकिन समृद्ध और गरीब के बीच आर्थिक समन्वय नहीं होने की वजह से विचारों को धरातल पर नहीं उतार पाए l गिने-चुने लोग ही ऐसे होते हैं, जो पैसों को अहमियत नहीं देते हुए सामाजिक कल्याण का बीड़ा उठाते हैं l

रैगर समाज में दहेजप्रथा जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने और दहेज उन्मूलन अभियान को धरातल पर उतारने के लिए प्रबुद्ध लोगो द्वारा युद्ध स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है । इस रूढ़िवादी परंपरा को बदलते हुए इन तीन परिवारो ने दहेज प्रथा के खिलाफ बडा कदम उठाया है जो एक सराहनीय पहल की है l जिसके लिए तीनो वर वधु के परिवार बधाई के पात्र है ।

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