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भगवानाराम सारण के नेत्रदान से दो लोग दुनिया देख सकेंगे

दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l सरदारशहर। क्षेत्र के ढ़ाणी पांचेरा गांव निवासी भगवानाराम सारण पुत्र श्योलालराम का निधन पीबीएम अस्पताल बीकानेर में होने पर उनके पुत्रों प्रभु राम, पीथाराम व ओमप्रकाश सारण ने पीबीएम अस्पताल बीकानेर में अपने पिता के नेत्रों का दान कर मानवता एवं परोपकार का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है जिसकी सर्वत्र प्रशंसा की जा रही है।

भगवानाराम सारण के नेत्रदान किये जाने पर उनकी धर्मपत्नी भागीदेवी,भाई सुलतानाराम तथा चेतराम सारण,भाई के पुत्र हरिराम, जयनारायण,रोहिताश, मुकेश पौत्र पवन, सुभाष तथा लीलाधर  का नेत्रदान एवं रक्तदान जनजागरण अभियान सरदारशहर के जिला संयोजक गणेशदास स्वामी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्व0भगवानाराम सारण की आंखों से दो अंधता से जूझ रहे लोगों के जीवन में नई रोशनी आ सकेगी।

नेत्रदान से बड़ा कोई महादान हो नहीं सकता। उल्लेखनीय है कि ढ़ाणी पांचेरा गांव में नवम्बर 2011में सेवानिवृत्त शिक्षक स्व0भोमसिंह सारण का नेत्रदान हो चुका है।

नेत्रदान प्रक्रिया के कारण अंतिम संस्कार में किसी तरह का विलंब नहीं होता है। कोई भी व्यक्ति अपना नेत्र गुप्त रूप से दान कर सकता है, जो उसकी मृत्यु के पश्चात एक मामूली से ऑपरेशन के जरिये आंखों से कोर्निया को निकाल लिया जाता है। इससे मृत व्यक्ति के शरीर में किसी तरह का परिवर्तन नहीं होता। नेत्रदान की बात को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार आंखे कभी भी वृद्ध नहीं होतीं, इसलिए इसके लिए किसी तरह की उम्र सीमा नहीं होती। एक वृद्ध व्यक्ति भी अपनी इच्छानुसार अपनी आंखें दान कर सकता है। नेत्रदान करके आप की आंखें अजर अमर बन सकती हैं।

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